वाराणसी में 807 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा भारत का पहला रोपवे: काशी रोपवे परियोजना की पूरी जानकारी डिटेल्स में जाने।

By Govinda D

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Kashi Ropeway Project

हमारी काशी नगरी तो भगवान शिव की जन्मभूमि है, लेकिन ट्रैफिक की भारी भीड़ में घाटों तक पहुंचना कभी-कभी सिरदर्द बन जाता है। अब खुशखबरी! 807 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से भारत का पहला Urban Ropeway बन रहा है, जो शहर की धमनियों को नई जान देगा। यह Kashi Ropeway Project मार्च 2024 से जोर-शोर से चल रहा काम है, और अगस्त 2025 तक पूरा हो जाएगा। गंगा मां के किनारे घूमने वाले लाखों भक्तों और पर्यटकों के लिए यह वरदान साबित होगा, क्योंकि पुरानी गलियों की जद्दोजहद खत्म हो जाएगी।

सोचिए तो, 3.75 किलोमीटर लंबा यह रोपवे कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन से शुरू होकर गोदौलिया चौक तक पहुंचेगा, बीच में पांच स्टेशन डालते हुए। हर केबिन में 10 लोग चढ़ सकेंगे, और सिर्फ 16-20 मिनट में आप काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन को पहुंच जाएंगे। टिकट की कीमत 100-150 रुपये ही रखी गई है, ताकि आम आदमी की जेब पर बोझ न पड़े। इससे न सिर्फ ट्रैफिक कम होगा, बल्कि हमारी वाराणसी की संस्कृति और पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी, जैसे गंगा की लहरें हमेशा तरोताजा रहती हैं।

निर्माण और तकनीकी विशेषताएं

हमारी काशी में यह Kashi Ropeway का निर्माण तो जैसे भगवान शिव की कृपा से चल रहा है, विश्व समुद्र इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड और स्विट्जरलैंड की मशहूर कंपनी बार्थोलेट मशीननबाउ एजी मिलकर इसे गढ़ रहे हैं। कुल 645 करोड़ रुपये की लागत से यह प्रोजेक्ट Hybrid Annuity Model पर आधारित है, जहां 60% पैसा निर्माण के दौरान और 40% संचालन-रखरखाव में मिलेगा, ताकि 15 साल तक सब कुछ चकाचक रहे। मार्च 2022 से शुरू हुए इस काम में 30 मजबूत टावर लगाए जा रहे हैं, जिनकी ऊंचाई 10 से 55 मीटर तक होगी, और ये गंगा की लहरों की तरह शहर को जोड़ेंगे। सोचिए, पुरानी गलियों की बजाय आसमान से वाराणसी का नजारा, यह तो हम सबके लिए नया सवेरा लाएगा।

देखो यार, यह रोपवे रोजाना 96,000 भक्तों और सैलानियों को उड़ान भरेगा, हर दिशा में प्रति घंटे 3000 लोग चढ़ सकेंगे, बिल्कुल ट्रैफिक की मार से आजादी। इसमें 153 चमचमाते Cabin लगेंगे, हर एक में 10 लोग आराम से बैठेंगे, और सिर्फ 16 मिनट में कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक पहुंच जाओगे। 16 घंटे चलने वाली यह तकनीकी कमाल वाली सिस्टम शहर के यातायात के बोझ को हल्का करेगी, जैसे गंगा मां की गोद में शांति मिलती है। हम काशी वासियों के लिए यह न सिर्फ सुविधा, बल्कि हमारी धरोहर को नई ऊंचाई देगा, आओ सब मिलकर इसका इंतजार करें।

Kashi Ropeway Project
Kashi Ropeway Project

स्टेशन और कनेक्टिविटी

हमारी काशी का Kashi Ropeway तो जैसे शहर की सैर को मजेदार बना देगा, इसमें पांच खास स्टेशन होंगे: वाराणसी कैंट, काशी विद्यापीठ (भारत माता मंदिर), रथ यात्रा, गिरजा घर और गोडौलिया चौक। खास बात ये कि गिरजा घर स्टेशन पर Passenger Changeover नहीं होगा, यानी बिना रुके सीधे मंजिल तक की सवारी, जैसे गंगा जी का प्रवाह। ये स्टेशन काशी विश्वनाथ मंदिर और घाटों को जोड़ेंगे, ताकि भक्त और पर्यटक बिना ट्रैफिक की टेंशन के दर्शन-पूजन कर सकें। सोचो, आसमान से काशी का नजारा लेते हुए मंदिर पहुंचना, ये तो हर काशीवासी का सपना सच होने जैसा है।

ये रोपवे सिर्फ तीर्थयात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे जैसे स्थानीय लोगों के लिए भी वरदान है। काशी विद्यापीठ और रथ यात्रा जैसे स्टेशन रोज की भागदौड़ को आसान बनाएंगे, चाहे ऑफिस जाना हो या बाजार। Traffic Congestion से छुटकारा मिलेगा और समय की बचत होगी, साथ ही गाड़ियों का धुआं कम होने से हमारी काशी की हवा भी थोड़ी और साफ रहेगी। ये परियोजना पर्यावरण को सहेजते हुए काशी की रौनक को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, जैसे हर हर महादेव के जयकारे आसमान छूते हैं।

परियोजना की पृष्ठभूमि और चुनौतियां

हमारी काशी तो भगवान शिव की नगरी है, लेकिन 2018 में जब Metro Project को ठुकरा दिया गया, तो सबके मन में सवाल उठा कि शहर की भीड़भाड़ कैसे संभाले। वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने तुरंत रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (राइट्स) को बुलाया और मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (एमआरटीएस) की योजना बनाने को कहा, जिसमें रोपवे और लाइट मेट्रो का आइडिया जोड़ा गया। नवंबर 2021 में यह प्लान पेश हुआ, लेकिन निविदा प्रक्रिया में बार-बार देरी हुई, जैसे गंगा की लहरें कभी रुकती ही नहीं। नेशनल हाइवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) ने व्यवहार्यता अध्ययन किया और यूपी सरकार के साथ मिलकर जमीन का काम पूरा किया, जबकि दो ऑस्ट्रियाई कंपनियां साल्जमैन और बर्नार्ड ग्रुप ने डिजाइन तैयार किया। यह सब हम काशी वासियों के लिए नया सपना था, जो पुरानी गलियों की जद्दोजहद से आजादी दिलाएगा।

अब चुनौतियों की बात करें तो यार, यह प्रोजेक्ट आसान नहीं था, लेकिन हमारी काशी की जिद ने सब कुछ संभाला। Land Acquisition की परेशानी, पर्यावरण पर असर और आखिरी स्टेशन के लिए जगह ढूंढना जैसे मुश्किलें आईं, खासकर काशी विश्वनाथ धाम के पास ट्रेडर्स की आपत्तियां और पुराने नालों का मैप न होना। निर्माण में विलंब हुआ, लेकिन अब तो सब पटरी पर है, मई 2025 तक पूरा होने का लक्ष्य साकार हो चुका, जैसे हर हर महादेव का जयकारा। यह Urban Ropeway न सिर्फ ट्रैफिक कम करेगा, बल्कि हमारी धरोहर को नई उड़ान देगा, ताकि भक्त और सैलानी आसानी से घाटों तक पहुंचें। आओ, इसकी सफलता पर गर्व करें, क्योंकि यह हम सबकी जीत है।

वाराणसी रोपवे मैप

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

भैया, हमारी काशी का Kashi Ropeway तो सिर्फ ट्रैफिक का बोझ ही नहीं हटाएगा, बल्कि शहर की जेब भी भर देगा। यह परियोजना Local Economy को चमकाएगी, क्योंकि काशी विश्वनाथ मंदिर और दशाश्वमेध घाट जैसे पवित्र स्थानों पर सैलानियों की भीड़ बढ़ेगी। स्थानीय दुकानदार, होटल वाले और गाइड भइया लोग तो खुशी से झूम उठेंगे, क्योंकि पर्यटकों की संख्या बढ़ने से उनकी कमाई भी बढ़ेगी। सोचो, गंगा मां के किनारे चाय-पकौड़े की दुकान से लेकर साड़ी-हस्तशिल्प तक, हर छोटा-बड़ा व्यापार फलता-फूलता नजर आएगा। ये रोपवे काशी को नई आर्थिक उड़ान देगा, जैसे हर हर महादेव का नारा आसमान छूता है।

और यार, ये रोपवे तो Environment Friendly भी है, जो हमारी काशी की हवा को और साफ रखेगा। गाड़ियों की भीड़ कम होगी, धुआं और शोर घटेगा, और गंगा मां की गोद में प्रदूषण का बोझ भी हल्का होगा। ये परियोजना काशी को एक स्मार्ट और आधुनिक शहर बनाएगी, जहां पुरानी परंपराएं और नई तकनीक का गजब का मेल दिखेगा। ये रोपवे सिर्फ सवारी नहीं, बल्कि हमारी काशी की शान और पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, जैसे गंगा आरती की लौ हर दिल को रौशन करती है।

निष्कर्ष

काशी रोपवे परियोजना वाराणसी के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जो न केवल शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगी बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगी। यह प्रोजेक्ट भारत में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ेगा, जो अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह परियोजना परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए काशी को और अधिक आकर्षक बनाएगी।

क्या यह रोपवे वाराणसी को एक विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में और मजबूत करेगा? यह सवाल न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए विचारणीय है। इस परियोजना का सफल कार्यान्वयन निश्चित रूप से भारत के शहरी विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

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Author – Govinda D The Brain Behind Waystruct’s Infrastructure Updates Welcome to Waystruct (waystruct.com), your go-to source for the latest highway construction updates, ropeway projects in India, and rail construction news. Leading our mission is Govinda D, a dedicated researcher with two years of experience in the infrastructure sector. Govinda specializes in delivering rail construction updates, sourcing data from NHAI, MoRTH, and Indian Railways to cover projects like the Ahmedabad–Mumbai Bullet Train, Delhi Metro Phase 4, and Varanasi Ropeway. Govinda’s goal is to make India’s infrastructure accessible to all. He simplifies complex rail, highway, and ropeway projects into engaging content. His expertise spans rail electrification, metro expansions, and smart infrastructure technologies. Using drone photos and timelapse videos, Govinda brings projects to life. For inquiries, reach out at spherelearn25@gmail.com or visit our Contact Page. Follow us on X, Facebook, and Instagram for real-time updates. With Govinda’s leadership, Waystruct is your trusted partner for infrastructure updates in India!

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