Kaimur Expressway compensation delay: भाइयों और बहनों, हमारे पड़ोसी राज्य बिहार के कैमूर जिले में Expressway का काम रुक गया है क्योंकि वहां के किसान भाई मुआवजे की देरी से परेशान हैं। आज 3 जनवरी 2026, शनिवार को हम देख रहे हैं कि यह बनारस से रांची होते हुए कोलकाता तक जाने वाला 690 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट, जिसका बजट 35 हजार करोड़ रुपये है, भारतमाला योजना का हिस्सा है और इलाके की कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने का सपना देखता है। लेकिन रिसर्च बताती है कि किसानों की जमीन अधिग्रहण में सर्कल रेट पुराना होने से मुआवजा बाजार मूल्य का सिर्फ 20% मिल रहा है, जिससे他们的 जीविका खतरे में पड़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सर्विस रोड और हर 5 किमी पर इंटरसेक्शन से बची जमीन भी बेकार हो जाएगी, इसलिए वे विरोध कर रहे हैं ताकि सरकार उनकी आवाज सुने और न्याय दे।
दोस्तों, इस Compensation विवाद ने कैमूर में 57 किलोमीटर के हिस्से को प्रभावित किया है, जहां सैकड़ों एकड़ जमीन इस्तेमाल हो रही है, लेकिन किसान भाइयों की भागीदारी के बिना ये डेवलपमेंट अधर में लटक सकता है। रिसर्च से पता चलता है कि पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह और किसान नेता राकेश टिकैत जैसे लोग 2023 से ही आंदोलन चला रहे हैं, और 2025 में पटना में पुलिस से झड़प तक हो चुकी है जहां पानी की बौछारें चलीं। Farmers मांग कर रहे हैं कि जमीन सिर्फ सहमति से ली जाए, मुआवजा बाजार मूल्य का चार गुना हो, और रोजगार व पुनर्वास की गारंटी मिले, वरना इलाके की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। उम्मीद है कि जल्दी समाधान निकलेगा, क्योंकि ये प्रोजेक्ट हमारे उत्तर प्रदेश के बनारस को भी जोड़ता है और सबके लिए तरक्की ला सकता है, बस अपनापन से मुद्दे सुलझाएं।
किसानों के मुआवजे में हो रही देरी की वजहें
भाइयों और बहनों, कैमूर एक्सप्रेसवे के Compensation में देरी की सबसे बड़ी वजह पुराने सर्किल रेट पर मुआवजा मिलना है, जो बाजार मूल्य से बहुत कम है। आज 3 जनवरी 2026, शनिवार को हम देख रहे हैं कि रिसर्च से पता चलता है कि 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा था, लेकिन 2017 में इसे सर्किल रेट का चार गुना कर दिया गया, जिससे किसान भाइयों को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, कागजातों की जांच, वेरिफिकेशन और प्रशासनिक प्रक्रिया में लंबा समय लगना भी बड़ा कारण है, कई गांवों में जमीन के प्रकार पर विवाद और आवेदन न जमा होने से भुगतान रुका हुआ है। किसान संगठनों का कहना है कि बिना उचित और समय पर पेमेंट के उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है, और ये देरी पूरे प्रोजेक्ट को पीछे धकेल रही है।
दोस्तों, दूसरी मुख्य वजह है Land Acquisition में किसानों का विरोध और सर्विस रोड न बनने की समस्या, जिससे बची हुई जमीन बेकार हो जाती है। रिसर्च बताती है कि कैमूर में कई किसान भाई मुआवजा कैंप का बहिष्कार कर रहे हैं क्योंकि प्रक्रिया जटिल है और भुगतान में महीनों लग जाते हैं, 2025 में पटना तक प्रदर्शन और झड़पें हुईं। Farmers मांग कर रहे हैं कि मुआवजा 1.40 करोड़ प्रति एकड़ हो, समान दर लागू हो और फसल नुकसान की अलग भरपाई मिले, वरना निर्माण नहीं चलने देंगे। ये सब मिलकर विश्वास की कमी पैदा कर रहा है, लेकिन अगर सरकार अपनापन दिखाए और जल्दी समाधान निकाले तो ये प्रोजेक्ट हमारे इलाके की तरक्की का रास्ता खोल सकता है।

NHAI Affected Expressway Segment Summary
कैमूर में मुआवजे की देरी से रुका बनारस-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे निर्माण: 5 प्रखंडों में किसानों का विरोध, सैकड़ों एकड़ भूमि प्रभावित – पूरा विवाद 2026! बिहार के कैमूर जिले में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे बनारस-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण मुआवजे में 4 महीनों की देरी के कारण रुक गया है, जिसमें 1 प्रमुख सेगमेंट (लगभग 57 किमी लंबाई), सैकड़ों एकड़ भूमि अधिग्रहण और 5 प्रखंडों (चांद, चैनपुर, भभुआ, भगवानपुर, रामपुर) के किसान प्रभावित हैं।
| Serial No. | Item | Details |
|---|---|---|
| 1 | Total Affected Segments | 1 प्रमुख एक्सप्रेसवे सेगमेंट (बनारस-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का कैमूर हिस्सा) |
| 2 | Included Districts/Areas | कैमूर जिला (चांद, चैनपुर, भभुआ, भगवानपुर, रामपुर प्रखंड) |
| 3 | Total Investment/Budget Amount | भारतमाला परियोजना के तहत (कैमूर सेगमेंट का स्पष्ट बजट नहीं, लेकिन विवादित भूमि सैकड़ों एकड़) |
| 4 | Total Units/Benefits | लगभग 57 किमी लंबाई, सैकड़ों एकड़ भूमि अधिग्रहण (किसानों को प्रभावित) |
| 5 | चांद प्रखंड | निर्माण कार्य रोका गया, किसानों ने विरोध में भाग लिया |
| 6 | चैनपुर प्रखंड | निर्माण कार्य रोका गया, कंपनी कैंप के पास प्रदर्शन |
| 7 | भभुआ प्रखंड | निर्माण कार्य रोका गया, किसान संघर्ष मोर्चा का मुख्य केंद्र |
| 8 | भगवानपुर प्रखंड | निर्माण कार्य रोका गया, स्थानीय किसानों का एकजुट विरोध |
| 9 | रामपुर प्रखंड | निर्माण कार्य रोका गया, 5 जनवरी को प्रस्तावित बैठक |
| 10 | Main Benefits | बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार बढ़ावा, अर्थव्यवस्था में उछाल; लेकिन मुआवजा देरी से विवाद और प्रगति प्रभावित |
विरोध प्रदर्शन का रूप और प्रभाव
भाइयों और बहनों, कैमूर के चांद, चैनपुर और भभुआ जैसे इलाकों में किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में Protest शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ तरीके से चल रहा है, जहां किसान भाई निर्माण साइट पर पहुंचकर कर्मचारियों से काम रोकने की अपील कर रहे हैं। आज 3 जनवरी 2026, शनिवार को हम देख रहे हैं कि रिसर्च से पता चलता है कि 2025 में करवंदिया और सिहोरा जैसे गांवों में मिट्टी काटने का काम शुरू होते ही किसान खेतों में लेट गए और विरोध किया, जिससे प्रशासन को काम रोकना पड़ा और कुछ किसानों को हिरासत भी लिया गया। स्थानीय समुदाय पूरी तरह एकजुट है, क्योंकि मुआवजा कम होने और सर्विस रोड न बनने से उनकी जमीन बेकार हो रही है। ये विरोध पटना तक प्रदर्शन और पुतला दहन तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक हिंसा नहीं हुई, बस अपील और धरना ही मुख्य रूप है ताकि सरकार उनकी बात सुने।
दोस्तों, इस Protest के प्रभाव से एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट की समयसीमा पर बड़ा असर पड़ रहा है, क्योंकि पहले से ही देरी हो चुकी है और अब कई हिस्सों में काम ठप पड़ा है। रिसर्च बताती है कि किसान भाइयों का आरोप है कि कंपनी अवैध तरीके से फसल रौंदकर और बिना सहमति मिट्टी काटकर आगे बढ़ रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए, और अगर मुद्दा नहीं सुलझा तो पूरे कैमूर जिले में निर्माण बंद करने की Warning दी गई है। Farmers संगठनों ने साफ कहा कि 1.40 करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा और समान दर न मिली तो विरोध और तेज होगा, जो न सिर्फ प्रोजेक्ट को पीछे धकेलेगा बल्कि इलाके की अर्थव्यवस्था और विश्वास को भी नुकसान पहुंचाएगा। उम्मीद है प्रशासन अपनापन दिखाए और बातचीत से जल्द समाधान निकाले, क्योंकि ये सड़क हम सबकी तरक्की के लिए है।
सरकारी अधिकारियों की प्रतिक्रिया और प्रयास
जिला प्रशासन ने किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लिया है और dialogue की प्रक्रिया शुरू की है। भू-अर्जन पदाधिकारी का कहना है कि compensation का भुगतान चल रहा है, लेकिन कुछ दस्तावेजों में सुधार की जरूरत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी किसानों को उनका हक मिल जाएगा। यह बयान विश्वास बहाली की दिशा में एक कदम है।
एनएचएआई और कंपनी के प्रतिनिधियों ने भी meetings आयोजित करने की बात कही है। पिछली वार्ताओं में सहमति बनी थी कि काम के साथ-साथ payments सुनिश्चित किए जाएंगे। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इस वादे को निभाएं। स्थानीय नेता भी मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं ताकि विवाद सुलझ सके।
आगे की चुनौतियां और समाधान के रास्ते
इस विवाद से project की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि पहले ही वन मंजूरी और अन्य मुद्दों से देरी हुई है। किसानों की मांग है कि transparent प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं न आएं। पांच जनवरी को होने वाली बैठक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

समाधान के लिए collaboration जरूरी है, जहां सभी पक्ष अपनी बात रख सकें। सरकार को timely कार्रवाई करनी होगी, वरना यह विरोध बड़ा रूप ले सकता है। क्षेत्र के विकास के लिए यह आवश्यक है कि किसानों के हितों की रक्षा हो। अंततः, संतुलित दृष्टिकोण से ही प्रगति संभव है।
निष्कर्ष
इस पूरे प्रकरण से साफ है कि development परियोजनाओं में किसानों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुआवजे की देरी ने कैमूर के किसानों को मजबूर कर दिया कि वे अपना protest दर्ज कराएं, जो एक बड़ा संकेत है। यदि समय पर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो यह अन्य क्षेत्रों में भी असर डाल सकता है। पाठकों को सोचना चाहिए कि आखिर infrastructure की कीमत पर किसानों के अधिकारों की अनदेखी क्यों हो रही है?
सरकार और किसान संगठनों के बीच बेहतर coordination से ही ऐसे विवाद सुलझ सकते हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि sustainable विकास तभी संभव है जब सभी हितधारकों को न्याय मिले। क्या हम ऐसी व्यवस्था बना पाएंगे जहां progress और न्याय साथ-साथ चलें? यह विचारणीय है।
FAQs
Q.1: बनारस-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे क्या है?
Ans: यह भारतमाला परियोजना के तहत एक प्रमुख राजमार्ग है जो उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ता है, जिसकी कुल लंबाई सैकड़ों किलोमीटर है।
Q.2: कैमूर जिले में एक्सप्रेसवे की लंबाई कितनी है?
Ans: कैमूर में इस परियोजना की लंबाई लगभग 57 किलोमीटर है, जिसमें बड़ी मात्रा में भूमि का अधिग्रहण किया गया है।
Q.3: किसानों ने निर्माण कार्य क्यों रोका?
Ans: मुआवजे के भुगतान में चार महीनों की देरी के कारण किसानों ने यह कदम उठाया, क्योंकि उनके खातों में राशि नहीं पहुंची।
Q.4: कौन से संगठन विरोध का नेतृत्व कर रहे हैं?
Ans: किसान संघर्ष मोर्चा और भारतीय किसान मजदूर यूनियन कैमूर इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं।
Q.5: विरोध कहां-कहां हुआ?
Ans: चांद, चैनपुर, भभुआ, भगवानपुर और रामपुर जैसे प्रखंडों में निर्माण कार्य रोका गया।
Q.6: सरकारी अधिकारी क्या कह रहे हैं?
Ans: भू-अर्जन पदाधिकारी का कहना है कि मुआवजा भुगतान चल रहा है, लेकिन कागजातों में कुछ समस्याओं के कारण देरी हो रही है।
Q.7: क्या कंपनी पर कोई आरोप लगे हैं?
Ans: किसानों ने पीएनसी कंपनी पर गैर-कानूनी तरीकों से काम करने का आरोप लगाया है।
Q.8: आगे क्या होने वाला है?
Ans: पांच जनवरी को रामपुर में किसानों की बैठक बुलाई गई है, जहां आगे की रणनीति तय होगी।
Q.9: भारतमाला परियोजना का उद्देश्य क्या है?
Ans: यह योजना देश के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।
Q.10: मुआवजे की देरी से किसानों पर क्या असर पड़ रहा है?
Ans: इससे उनके दैनिक जीवन और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।
Q.11: क्या यह विरोध पूरे जिले में फैल सकता है?
Ans: हां, यदि समस्या नहीं सुलझी तो पूरे कैमूर में निर्माण कार्य ठप करने की चेतावनी दी गई है।
Q.12: कैसे सुलझ सकता है यह विवाद?
Ans: वार्ता और पारदर्शी प्रक्रिया से, जहां सभी पक्ष अपनी बात रख सकें और समय पर भुगतान सुनिश्चित हो।











