बिहार रोपवे हादसा: अनुमानित बजट 270 करोड़ रुपये, जांच में लापरवाही उजागर, इंजीनियर निलंबित और ठेकेदार ब्लैकलिस्ट

By Govinda D

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Bihar ropeway accident

Bihar ropeway accident: भाईयों, आज 3 जनवरी 2026, शनिवार को हम बात कर रहे हैं बिहार के रोहतास जिले में हुए उस Ropeway Collapse की, जो दिसंबर 2025 के आखिर में ट्रायल रन के दौरान हुआ था। हमारे उत्तर प्रदेश में भी ऐसे पर्यटन प्रोजेक्ट चलते हैं, जहां पहाड़ी इलाकों तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश होती है, ठीक वैसे ही ये रोपवे रोहतासगढ़ किले और चौरासन मंदिर तक जाने के लिए बनाया जा रहा था, लेकिन लोड टेस्ट में वायर रस्सी फिसलने से टावर और केबिन गिर गए। सौभाग्य से कोई जान नहीं गई, पर ये हादसा हमें बताता है कि विकास के नाम पर जल्दबाजी कितनी खतरनाक हो सकती है, और स्थानीय लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। प्रोजेक्ट का बजट करीब 13 करोड़ रुपये था, जो 2020 से चल रहा था और जनवरी 2026 में शुरू होने वाला था, लेकिन अब सब रुक गया है।

दोस्तों, जांच में Safety Negligence साफ उजागर हुई, जहां ठेकेदार और इंजीनियरों की लापरवाही से घटिया सामग्री इस्तेमाल हुई और मॉनिटरिंग की कमी रही, जिससे सरकार ने दो इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया और कंस्ट्रक्शन कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया। हमारे यहां यूपी में भी ऐसी घटनाओं से सीख लेकर, हम आम लोग अधिकारियों पर नजर रख सकते हैं ताकि पर्यटन बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट सुरक्षित रहें और लोकल इकोनॉमी को फायदा हो। IIT पटना अब Quality Audit कर रहा है, जो ये सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसी गलतियां न हों, और रोहतास के लोग जो इस रोपवे से रोजगार की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें निराशा न मिले। ये घटना हमें याद दिलाती है कि विकास में गुणवत्ता सबसे ऊपर होनी चाहिए, वरना बड़े सपने छोटी लापरवाही से टूट जाते हैं।

जांच में क्या निकला सामने IIT पटना के विशेषज्ञ

बिहार के रोहतास रोपवे हादसे की जांच के बारे में, जो दिसंबर 2025 में ट्रायल के दौरान हुआ था। जांच रिपोर्ट में साफ-साफ Grave Negligence सामने आई है, जहां ठेकेदार और विभाग के इंजीनियरों ने गंभीर लापरवाही बरती, ट्रायल के वक्त जरूरी सुरक्षा इंतजाम नहीं थे और कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर मौजूद नहीं था। हमारे यूपी में भी बड़े प्रोजेक्ट चलते हैं, तो ये घटना हमें सिखाती है कि पर्यटन के लिए बन रहे रोपवे जैसे कामों में सुपरविजन कितना जरूरी है, वरना स्थानीय लोगों की रोजगार और टूरिज्म की उम्मीदें चूर-चूर हो जाती हैं। सरकार ने तुरंत एक्शन लिया, दो इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया और ठेकेदार कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

दोस्तों, रिपोर्ट में Safety Violations और टेक्निकल फॉल्ट्स को मुख्य वजह बताया गया, जैसे निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ और मॉनिटरिंग की कमी रही, जिससे वायर फंसने पर टावर गिर गया। अब IIT पटना के विशेषज्ञ Quality Audit कर रहे हैं, ताकि सामग्री की गुणवत्ता और स्ट्रक्चरल डिजाइन की पूरी पड़ताल हो और भविष्य में ऐसी गलतियां न हों। हम यूपी के लोग भी ऐसे मामलों से सीखें, अपने इलाके के विकास प्रोजेक्ट्स पर नजर रखें, ताकि सरकारी पैसा सही जगह लगे और लोकल इकोनॉमी मजबूत हो। ये जांच पारदर्शिता की मिसाल है, जो बताती है कि लापरवाही करने वालों को सजा मिलनी चाहिए, वरना बड़े सपने अधूरे रह जाते हैं।

Bihar ropeway accident

दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई


भाइयों, हमारे यहां उत्तर भारत में, खासकर बिहार जैसे इलाकों में, जब कोई बड़ा प्रोजेक्ट चलता है तो उसकी जिम्मेदारी सबकी होती है, लेकिन रोहतास रोपवे हादसे ने सबको चौंका दिया। जांच कमिटी ने पाया कि Project Engineer और Junior Engineer की भारी लापरवाही से ट्रायल रन में वायर रोप फिसल गया, जिससे ऊपरी स्टेशन को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी की जान नहीं गई। मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने खुद कहा कि ऐसी गलतियां बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएंगी, और तुरंत इन दोनों को सस्पेंड कर दिया गया, साथ ही विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई। यह कदम न सिर्फ जवाबदेही बढ़ाता है, बल्कि आम लोगों को भरोसा देता है कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर सख्त है, और IIT पटना अब डिजाइन की जांच कर रहा है ताकि आगे ऐसी चूक न हो।

दोस्तों, ठेकेदारों को भी अब सबक मिलना चाहिए, क्योंकि Ropeway and Resource Private Limited नाम की कोलकाता वाली कंपनी ने सेफ्टी में बड़ी कोताही बरती, जिसकी वजह से हादसा हुआ और गांववालों की पहले की शिकायतें भी नजरअंदाज की गईं। सरकार ने इस कंपनी को Blacklist करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में कोई और प्रोजेक्ट न मिले, और सुधार का काम उनके खर्चे पर होगा। मंत्री जायसवाल ने पुष्टि की कि नेग्लिजेंस और टेक्निकल फ्लॉज की वजह से यह फैसला लिया गया, जो अन्य कंपनियों के लिए चेतावनी है। इससे हमारे इलाके के प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता बढ़ेगी, और हम सब मिलकर ऐसी घटनाओं से बच सकेंगे, क्योंकि अपनों की सुरक्षा सबसे ऊपर है।

Bihar Road Construction Department Ropeway Incident Summary


बिहार रोपवे हादसा 2026: रोहतास में Grave Negligence के बाद 2 इंजीनियर सस्पेंड, ठेकेदार ब्लैकलिस्ट – पूरी डिटेल्स | बिहार के रोहतास जिले में 13 करोड़ की रोपवे परियोजना ट्रायल के दौरान ढह गई, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन जांच में गंभीर लापरवाही उजागर हुई – 2 इंजीनियर निलंबित, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू, और IIT पटना से जांच जारी।

Serial No.ItemDetails
1Total Projects Involved1 रोपवे परियोजना (रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम तक पहुंच के लिए)
2Included Districts/Areasरोहतास जिला (Rohtas District)
3Total Investment/Budget Amountकरीब 13 करोड़ रुपये (Estimated Cost Rs 13 Crore)
4Total Units/Benefits18 केबिन (प्रत्येक में 4 यात्री), पर्यटन को बढ़ावा और आसान पहुंच
5Incident Date26 दिसंबर 2025 (Load Test के दौरान हादसा)
6Project Length1,324 मीटर (1,324 Metres Long Ropeway)
7Contractor DetailsRopeway and Resource Private Limited (कोलकाता आधारित, ब्लैकलिस्ट प्रक्रिया शुरू)
8Actions Taken2 इंजीनियर (Project Engineer और Junior Engineer) निलंबित
9Further InquiryIIT पटना द्वारा स्ट्रक्चरल डिजाइन और लोड डिस्ट्रीब्यूशन की जांच
10Main Benefitsपर्यटन बढ़ावा, रोहतासगढ़ किला तक आसान पहुंच, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती, सुरक्षा सबक और बेहतर क्वालिटी कंट्रोल

रोपवे परियोजना की पृष्ठभूमि Estimated cost करीब 13 करोड़ रुपये

यह Bihar Ropeway Project फरवरी 2020 में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य रोहतासगढ़ किले और रोहितेश्वर धाम तक पर्यटकों की पहुंच आसान बनाना था। Estimated cost करीब 13 करोड़ रुपये थी, और यह 1,324 मीटर लंबी है जिसमें 18 केबिन हैं। प्रत्येक केबिन में चार यात्री बैठ सकते हैं, जो स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देगी। लेकिन समय सीमा में कई बार देरी हुई, जो अब हादसे का कारण बनी।

Construction बिहार राज्य ब्रिज निर्माण निगम के तहत हो रही थी, लेकिन delays ने परियोजना को प्रभावित किया। Tourism boost के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि रोहतास जिला ऐतिहासिक स्थलों से भरा है। अब इस हादसे ने planning flaws को उजागर किया, और सरकार को बेहतर निगरानी की जरूरत महसूस हो रही है। यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हो सकती है अगर सही तरीके से पूरी हो।

भविष्य की चुनौतियां और सबक Future projects

हादसे के बाद expert examination जारी है, जिसमें आईआईटी पटना load distribution और structural plans की जांच कर रहा है। यह रिपोर्ट आने के बाद ही परियोजना आगे बढ़ेगी, ताकि कोई जोखिम न रहे। सरकार ने वादा किया है कि पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोपरि होगी, और नए मानक लागू किए जाएंगे। यह कदम विकास कार्यों में innovation को प्रोत्साहित करेगा।

इस घटना से हमें risk management की अहमियत समझ आती है, और अन्य राज्यों को भी अलर्ट रहना चाहिए। Future projects में transparency सुनिश्चित करने से ऐसी दुर्घटनाएं रोकी जा सकती हैं। अब फोकस गुणवत्ता पर होगा, जो बिहार के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। पाठकों को इस पर नजर रखनी चाहिए ताकि विकास सतत रहे।

निष्कर्ष

बिहार के रोपवे हादसे ने grave negligence और safety lapses को उजागर किया, जो विकास परियोजनाओं में लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। जांच से मिले सबकों को अपनाकर सरकार अब मजबूत कदम उठा रही है, जिसमें इंजीनियरों का निलंबन और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना शामिल है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि quality assurance के बिना कोई प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सकता। क्या हम ऐसी गलतियों से सीखकर बेहतर भविष्य बना सकते हैं?

इस हादसे का असर पर्यटन पर पड़ेगा, लेकिन अगर सही सुधार किए जाएं तो रोहतास क्षेत्र tourism hub बन सकता है। Accountability और expert oversight से ही विश्वास बहाल होगा, और पाठकों को सोचना चाहिए कि विकास में सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। आखिरकार, यह सबक पूरे देश के लिए है कि लापरवाही की कीमत बड़ी हो सकती है।

FAQs


Q.1: बिहार रोपवे हादसा कब हुआ?
Ans: यह हादसा दिसंबर 2025 के अंत में रोहतास जिले में load test के दौरान हुआ, जब वायर रोप फिसल गया।

Q.2: हादसे में कितने लोग घायल हुए?
Ans: सौभाग्य से इस incident में कोई घायल नहीं हुआ, क्योंकि यह ट्रायल रन था।

Q.3: जांच में क्या मुख्य निष्कर्ष निकले?
Ans: जांच ने grave negligence, technical faults और safety violations को मुख्य कारण बताया।

Q.4: सरकार ने क्या कार्रवाई की?
Ans: Project engineer और junior engineer को निलंबित किया गया, और ठेकेदार को blacklist करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

Q.5: रोपवे परियोजना की लागत कितनी है?
Ans: इस ropeway project की estimated cost करीब 13 करोड़ रुपये है।

Q.6: परियोजना कब शुरू हुई थी?
Ans: निर्माण फरवरी 2020 में शुरू हुआ, लेकिन कई delays के कारण देरी हुई।

Q.7: रोपवे की लंबाई कितनी है?
Ans: यह 1,324 मीटर लंबी है, जिसमें 18 cabins हैं जो पर्यटकों को ले जाएंगी।

Q.8: आगे क्या जांच हो रही है?
Ans: आईआईटी पटना structural design और load distribution की जांच कर रहा है।

Q.9: ठेकेदार कंपनी का नाम क्या है?
Ans: कोलकाता स्थित Ropeway and Resource Private Limited इस प्रोजेक्ट को संभाल रही थी।

Q.10: यह परियोजना किस लिए है?
Ans: रोहतासगढ़ किले और रोहितेश्वर धाम तक पहुंच आसान बनाने के लिए, जो tourism boost देगी।

Q.11: मंत्री ने क्या कहा?
Ans: सड़क निर्माण मंत्री ने gross negligence की पुष्टि की और सख्त कार्रवाई का ऐलान किया।

Q.12: क्या परियोजना रुक गई है?
Ans: हां, जांच पूरी होने तक future plans पर काम रुका हुआ है।

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Govinda D

Author – Govinda D The Brain Behind Waystruct’s Infrastructure Updates Welcome to Waystruct (waystruct.com), your go-to source for the latest highway construction updates, ropeway projects in India, and rail construction news. Leading our mission is Govinda D, a dedicated researcher with two years of experience in the infrastructure sector. Govinda specializes in delivering rail construction updates, sourcing data from NHAI, MoRTH, and Indian Railways to cover projects like the Ahmedabad–Mumbai Bullet Train, Delhi Metro Phase 4, and Varanasi Ropeway. Govinda’s goal is to make India’s infrastructure accessible to all. He simplifies complex rail, highway, and ropeway projects into engaging content. His expertise spans rail electrification, metro expansions, and smart infrastructure technologies. Using drone photos and timelapse videos, Govinda brings projects to life. For inquiries, reach out at spherelearn25@gmail.com or visit our Contact Page. Follow us on X, Facebook, and Instagram for real-time updates. With Govinda’s leadership, Waystruct is your trusted partner for infrastructure updates in India!

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